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क्या vaccination के कारण autism हो सकता है |

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आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में Autism को प्रायः disease की श्रेणी में नहीं रखा जाता, बल्कि इसे एक neurodevelopmental condition माना जाता है।
इसी प्रकार सफेद कुष्ठ (Vitiligo) को भी कई बार बीमारी नहीं माना जाता, क्योंकि यह शरीर को प्रत्यक्ष शारीरिक कष्ट नहीं देता।

लेकिन आयुर्वेद का रोग-सिद्धांत इससे भिन्न और अधिक व्यापक है
आयुर्वेद के अनुसार जो अवस्था व्यक्ति को मानसिक, सामाजिक या भावनात्मक दुःख दे — वह भी रोग ही है।


आयुर्वेद में स्वास्थ्य और रोग की परिभाषा

आयुर्वेद का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सूत्र देखिए:

सुखसंज्ञकमारोग्यं विकारो दुःखमेव च

अर्थ

  • आरोग्य वह अवस्था है जो सुख प्रदान करे

  • विकार वह है जो दुःख उत्पन्न करे

  • अतः दुःख ही रोग है

इस सूत्र के अनुसार,
यदि कोई अवस्था व्यक्ति को लगातार मानसिक पीड़ा, हीनभावना, भय या तनाव देती है,
तो चाहे वह शरीर को सीधा नुकसान न भी पहुँचाए — वह रोग ही मानी जाएगी


आयुर्वेद की दृष्टि में Autism क्यों रोग है?

  मानसिक दुःख भी वास्तविक रोग है

Autism से पीड़ित बालक:

  • सामाजिक संपर्क में कठिनाई अनुभव करता है

  • संप्रेषण (communication) में बाधा होती है

  • माता-पिता निरंतर मानसिक तनाव में रहते हैं

आयुर्वेद में मन (Manas) और शरीर (Sharira) दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए Autism को आयुर्वेद स्पष्ट रूप से मानसिक-दैहिक रोग अवस्था मानता है।


आधुनिक विज्ञान का Autism पर दृष्टिकोण

   DNA और Environment का Interaction

आधुनिक विज्ञान के अनुसार Autism:

  • मातृगर्भ में

  • घर तथा बाहरी environment में

  • बालक के DNA में स्थित genes के साथ interaction का परिणाम है

कुछ मान्यताएँ यह भी कहती हैं कि:

  • माता या पिता को बचपन में लगे vaccination का प्रभाव भी हो सकता है

हालाँकि अनेक शोध यह भी बताते हैं कि vaccination और Autism के बीच प्रत्यक्ष संबंध सिद्ध नहीं हुआ है


Vaccination पर एक वैचारिक विमर्श

     प्रश्न जो अब भी अनुत्तरित हैं

यह कहना सही नहीं होगा कि vaccination निश्चित रूप से Autism का कारण है,
लेकिन यह कहना भी पूर्ण सत्य नहीं कि vaccination के दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभावों पर संपूर्ण शोध हो चुका है

   Antigen–Antibody प्रतिक्रिया का प्रश्न

जब शरीर में vaccine डाली जाती है:

  • नया antigen–antibody बनता है

  • पहले से मौजूद antibodies से उसका क्या संबंध बनेगा —
    इस पर पर्याप्त शोध उपलब्ध नहीं है, विशेषकर उन व्यक्तियों में जिन्हें पहले से:

  • metabolic disorder

  • immune imbalance
    हो।


Metabolic Disorder और Vaccination का जोखिम

   जब शरीर पहचान करने में असमर्थ हो

यदि किसी व्यक्ति का immune system:

  • अच्छे और बुरे कोशिकाओं में अंतर न कर पा रहा हो
    और उस अवस्था में vaccine दे दी जाए,
    तो शरीर उसे शत्रु मानकर असामान्य प्रतिक्रिया कर सकता है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि:

  • नष्ट हुई vaccine-antibody कितने समय तक रक्त में रहती है

  • क्या वह भविष्य में किसी गंभीर रोग का कारण बन सकती है


सरल उदाहरण से समझिए

  दो कुत्तों का उदाहरण

मान लीजिए आपके घर में:

  • पहले से एक कुत्ता है

  • अचानक एक नया कुत्ता ले आए

दोनों में मित्रता होगी या संघर्ष — यह पहले से तय नहीं होता।
इसी प्रकार शरीर में:

  • पुरानी antibodies

  • नई vaccine antibodies
    के बीच सामंजस्य या संघर्ष — व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है।

कुत्ते को तो घर से निकाला जा सकता है,
लेकिन vaccine को शरीर से बाहर निकालना संभव नहीं


क्या इससे Autism या अन्य रोग हो सकते हैं?

यह पूर्ण रूप से कहा नहीं जा सकता कि:

  • इससे Autism होगा ही

और यह भी पूर्ण रूप से नहीं कहा जा सकता कि:

  • इससे कभी कोई रोग नहीं हो सकता

आयुर्वेद इसी अनिश्चितता को स्वीकार करता है और
व्यक्ति की प्रकृति (Prakriti) पर बल देता है।


यदि Autism vaccination से जुड़ा हो तो आयुर्वेदिक चिकित्सा

 बुद्धि और स्मृति को जागृत करने की चिकित्सा

आयुर्वेद में ऐसी अवस्था में:

  • बुद्धिजनक चिकित्सा

  • स्मृतिवर्धक चिकित्सा

का प्रयोग किया जाता है, जिससे:

  • निस्तेज कोशिकाएँ पुनः सक्रिय हों

  • मस्तिष्क की प्राकृतिक बुद्धि जागृत हो

  • शरीर पुनः प्राकृत अवस्था में लौट सके


Autism और पालतू जानवर

  गर्भावस्था, पालतू जानवर और जोखिम

समाज में यह मान्यता है कि:

  • कुत्ता, बिल्ली आदि से rabies या अन्य विष फैल सकता है

वैज्ञानिक रूप से:

  • गर्भावस्था में पालतू जानवरों से Autism होता है — ऐसा निर्णायक शोध नहीं है

परंतु आयुर्वेद कहता है:

  • गर्भावस्था में अत्यधिक सावधानी आवश्यक है

  • पूर्ण इनकार या पूर्ण स्वीकृति — दोनों ही वैज्ञानिक दृष्टि से अधूरी हैं


Autism उपचार से पहले आयुर्वेद चिकित्सक की जिम्मेदारी

   समग्र दृष्टि आवश्यक है

एक आयुर्वेद चिकित्सक को Autism उपचार से पहले विचार करना चाहिए:

  • माता-पिता का स्वास्थ्य

  • गर्भकालीन वातावरण

  • vaccination history

  • metabolic व immune स्थिति

  • मानसिक एवं भावनात्मक कारक

क्योंकि आयुर्वेद केवल उपचार नहीं,
गहन निरीक्षण और विवेकपूर्ण चिंतन की विद्या है


निष्कर्ष: जहाँ दुःख है, वहाँ रोग है

आधुनिक चिकित्सा जहाँ रोग को केवल शारीरिक क्षति से मापती है,
वहीं आयुर्वेद कहता है:

जो दुःख देता है — वही रोग है

इसीलिए:

  • Autism आयुर्वेद में रोग है

  • Vitiligo आयुर्वेद में रोग है

  • मानसिक पीड़ा भी वास्तविक बीमारी है

यही आयुर्वेद की शाश्वत और मानवीय दृष्टि है।

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