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Gandhak Rasayan Benefits: गंधक रसायन पर वैद्यों का प्रयोगात्मक विचार |

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Gandhak Rasayan: गंधक रसायन का उपयोग आधुनिक एलोपैथी में पाए जाने वाले एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटी-ऑक्सीडेंट, कार्डियो-प्रोटेक्टिव और न्यूरो-प्रोटेक्टिव दवाओं के समकक्ष कार्य करता है। एलोपैथी में अलग-अलग दवाएं विभिन्न विकारों के लिए दी जाती हैं, जबकि आयुर्वेद में गंधक एक बहुउपयोगी औषधि है जो पूरे शरीर को संतुलित करके संपूर्ण स्वास्थ्य सुधार में सहायक होती है।
ऐसे अत्यधिक बहु उपयोगी  Gandhak Rasayan के विषय में संपूर्ण जानकारी को लेकर में इस post को आपके सामने उपस्थित हूं post को अच्छी तरह से पढ़े और इस गंधक रसायन का सच्चे हृदय से मूल्यांकन करें।

Gandhak Rasayan गंधक रसायन क्या है?

गंधक रसायन आयुर्वेद में एक अत्यंत प्रभावी औषधि मानी जाती है, जो शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने और पाचन तंत्र को सशक्त करने में मदद करती है। यह औषधि विशेष रूप से पित्त दोष के असंतुलन को नियंत्रित करने, शरीर की दुर्बलता को दूर करने और आंतरिक व बाहरी संक्रमणों से रक्षा करने में सहायक होती है।

गंधक रसायन के प्रमुख घटक गुणधर्म:

गंधक रसायन को आयुर्वेदिक ग्रंथों में विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। इसके मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:

गाय के दूध से शोधित गंधक

  • -  गुणधर्म:  रसायन, रक्तशुद्धिकर, कृमिनाशक, त्वचाविकारहर  
  • -  प्रभाव:  उष्ण  
  • - उपयोग: कुष्ठरोग, त्वचा विकार, संधिवात, पाचन तंत्र की शुद्धि  

गंधक रसायन में इलायची (Elettaria cardamomum)  

  • - गुणधर्म: दीपन, पाचन, कफहर, हृदय बल्य  
  • - प्रभाव: शीत  
  • - उपयोग: अपच, मुखशुद्धि, हृदय रोग, श्वसन तंत्र के विकार  

गंधक रसायन में दालचीनी (Cinnamomum verum) 

  • - गुणधर्म: दीपन, पाचन, रक्त शोधक, कफहर  
  • - प्रभाव: उष्ण  
  • - उपयोग: मधुमेह नियंत्रण, रक्तसंचार सुधार, हृदय स्वास्थ्य  

गंधक रसायन में तेजपत्र (Cinnamomum tamala)

  • - गुणधर्म: दीपन, पाचन, कफहर, वायुनाशक  
  • - प्रभाव: उष्ण  
  • - उपयोग: जोड़ों के दर्द, गैस, पाचन शक्ति सुधारने के लिए  

गंधक रसायन में नागकेशर (Mesua ferrea)  

  • - गुणधर्म: रक्तस्तंभक, रसायन, कफहर, उत्तेजक  
  • - प्रभाव: शीत  
  • - उपयोग: रक्तस्राव, त्वचा विकार, हृदय संबंधी रोग  

गंधक रसायन में  गिलोय का स्वरस (Tinospora cordifolia)

  • -  गुणधर्म: रसायन, अमृत तुल्य, दीपन-पाचन, ज्वरघ्न  
  • - प्रभाव: शीत  
  • - उपयोग: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना, बुखार, संधिवात, पाचन विकार  

गंधक रसायन में हरड़ (Terminalia chebula)

  • - गुणधर्म: त्रिदोषहर, रेचक, पाचन सुधारक, कायाकल्प  
  • - प्रभाव: गरम  
  • - उपयोग: कब्ज, पाचन विकार, शरीर की शुद्धि  

गंधक रसायन में बहेड़ा (Terminalia bellirica)  

  • -  गुणधर्म: कफहर, वायुनाशक, नेत्रहितकारी  
  • - प्रभाव:  शीत  
  • - उपयोग: फेफड़ों की सफाई, दृष्टि सुधार, बालों के लिए लाभकारी  

गंधक रसायन में आंवला (Emblica officinalis)

  • - गुणधर्म: रसायन, त्रिदोषहर, वात-पित्त शमन  
  • - प्रभाव: शीत  
  • - उपयोग:  रोग प्रतिरोधक क्षमता, बालों व त्वचा के लिए लाभकारी  

गंधक रसायन में भांगरे का रस (Eclipta alba) 

  • - गुणधर्म: केशवर्धक, यकृत रोग नाशक, पाचन सुधारक  
  • - प्रभाव: शीत  
  • - उपयोग: बालों का झड़ना रोकना, लिवर टॉनिक, हृदय रोग  

गंधक रसायन में अदरक का रस (Zingiber officinale)  

  • - गुणधर्म: दीपन, पाचन, कफहर, वातहर  
  • - प्रभाव: उष्ण  
  • - उपयोग: जुकाम, अपच, भूख बढ़ाने के लिए, वातरोगों में लाभकारी  

यह सभी औषधियां अपने-अपने गुणों से शरीर की संपूर्ण आरोग्यता के लिए उपयोगी हैं।
शरीर में प्रभाव के हिसाब से इन जड़ी बूटियां को इस तरह से differential किया जा सकता है।

गंधक रसायन आयुर्वेद  गुण धर्म एवं  प्रभाव के अनुसार विभाजन

1. उष्ण (गर्म प्रभाव वाली औषधियां)

  • - गाय के दूध से शोधित गंधक → रक्तशुद्धिकर, त्वचारोग नाशक  
  • - दालचीनी → पाचन सुधारक, रक्त शोधक  
  • - तेजपत्र → वात-कफ नाशक, संधिवातहर  
  • - हरड़ → रेचक, पाचन तंत्र सुधारक  
  • - अदरक का रस → कफहर, वातहर, अग्निदीपक  

 2. शीत (ठंडा प्रभाव वाली औषधियां) 

  • - इलायची → हृदय बल्य, मुखशुद्धिकर  
  • - नागकेशर → रक्तस्तंभक, हृदय रोगों में लाभकारी  
  • - गिलोय का स्वरस→ रसायन, इम्यूनिटी बूस्टर  
  • - बहेड़ा → कफहर, फेफड़ों की सफाई करने वाला  
  • - आंवला→ त्रिदोषहर, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला  
  • - भांगरे का रस → लिवर टॉनिक, केशवर्धक  

मुख्य प्रभाव के अनुसार वर्गीकरण ( गुणों के अनुसार) 

1. पाचन तंत्र पर प्रभावी औषधियां (दीपन-पाचन व अग्निवर्धक)

  • - दालचीनी  
  • - तेजपत्र  
  • - अदरक का रस  
  • - हरड़  

2. रक्त एवं त्वचा शुद्ध करने वाली औषधियां

  • - गाय के दूध से शोधित गंधक  
  • - गिलोय का रस  
  • - नागकेशर  

3. रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने वाली औषधियां

  • - गिलोय  
  • - आंवला  
  • - भांगरा  

4. वात एवं कफ नाशक औषधियां

  • - तेजपत्र  
  • - हरड़  
  • - बहेड़ा  
  • - अदरक  

5. बालों एवं लिवर के लिए लाभकारी

  • - भांगरा  
  • - आंवला  
  • - बहेड़ा  

इस प्रकार, इन सभी औषधियों के गुणों के अनुसार उनके उपयोग में भिन्नता देखी जा सकती है।

गंधक रसायन किन रोगों में लाभकारी है?

गंधक रसायन विभिन्न शारीरिक विकारों में उपयोगी माना जाता है। यह निम्नलिखित समस्याओं में विशेष रूप से लाभदायक है:
अब इस गंधक रसायन का खूबी को यदि हम ग्रन्थों के सूत्र से समझने का प्रयास करेंगे तो यह दो श्लोक में आपके सामने रख रहा हूं।

घोरातिसारं ग्रहणीपदं च हरेच्च रक्तं हृद्शूलयुक्तम् ।
जीर्णज्वरे मेहगणे प्रकृष्टं वातामयानां हरणे समर्थम् । 
प्रजाकरं केशमतीव कृष्णं करोति चेद्भक्षति चार्धवर्षम् ।

 योगरत्नाकर रसायनाधिकार 

घोर अतिसार इसका मतलब होता है यदि आपको डायरिया बार-बार होता रहता हो, blood में पित्तज toxin हो , इसके कारण हृदय में दर्द होता हो, लंबे समय से बुखार आता हो, संतान उत्पादक शक्ति शरीर से नाश हो गया हो, बार-बार बाल झड़ जाते हो तो योग रत्न करने इसको 6 महीने तक continue खाने की बात बताई है।

धातुक्षयोत्थितान् रोगान् तथा कोष्ठसमाश्रितान् ।
प्रमेहान् शीर्षजान् रोगान् शूलं कुष्ठादिकानपि ॥
क्षाराम्ललवणादीनि कोपादीन् वनितासुखं ।
द्विदलानि च शाकानि गन्धसेवी विवर्जयेत् ॥ 
रसतरंगिणि

रस्तरंगिणी में यह सूत्र लिखा हुआ है इसमें धातुओं की कमजोरी होने पर या जो दोष कोष्ठ में आश्रित हो, इस ग्रंथ में गंधक रसायन के लिए प्रमेह और त्वचा रोग में विशेष जोर दिया है।

गंधक (सल्फर) आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण रस-औषधि के रूप में जाना जाता है, जिसे विशेष रूप से *गंधक रसायन* के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसके गुणों का वर्णन करते समय हम इसे आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा से तुलना करके देख सकते हैं।  

1. धातुक्षय (शारीरिक कमजोरी और वीर्य की हानि में गंधक रसायन लाभदायक)

   -  आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: गंधक रसायन को *वीर्यवर्धक* और *बल्य* माना जाता है, जो शरीर की धातुओं को पोषण देता है और पुनरुत्पादक (reproductive) प्रणाली को मजबूत करता है।  
   -  एलोपैथिक दृष्टिकोण:एलोपैथी में इस समस्या को मुख्य रूप से *टेस्टोस्टेरोन बूस्टर* और *एंटीऑक्सीडेंट सप्लीमेंट्स* से प्रबंधित किया जाता है। गंधक, शरीर में रक्त परिसंचरण को सुधारकर *मेटाबोलिज्म और टेस्टोस्टेरोन उत्पादन* में सहायक हो सकता है। 

2. कंडु (खुजली) और कुष्ठ रोग (त्वचा विकारों में  गंधक रसायन प्रभावी)

 - आयुर्वेदिक दृष्टिकोण:- गंधक में कृमिघ्न और रक्तशोधक गुण होते हैं, जो त्वचा रोगों को दूर करते हैं।  
   -एलोपैथिक दृष्टिकोण: एलोपैथी में एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल दवाओं (जैसे traconazole, Terbinafine) का उपयोग खुजली और चर्म रोगों के लिए किया जाता है। गंधक का उपयोग त्वचा के इंफेक्शन, दाद, एक्जिमा, सोरायसिस और कुष्ठ रोग में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल के रूप में किया जाता है।  

3. शिरोरोग (सिरदर्द और माइग्रेन में गंधक रसायन लाभदायक)

  -  आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: गंधक  वातहर और  शूलहर है, जिससे सिरदर्द, माइग्रेन और तंत्रिका तंत्र की समस्याओं में राहत मिलती है।  
   - एलोपैथिक दृष्टिकोण: माइग्रेन और सिरदर्द का एलोपैथिक उपचार  NSAIDs (Ibuprofen, Aspirin), ट्रिप्टेन्स (Sumatriptan) जैसी दवाओं से किया जाता है।गंधक रसायन तंत्रिका तंत्र को संतुलित कर ब्रेन फंक्शन को सुधारने में सहायक होता है, जो  एलोपैथिक न्यूरो-प्रोटेक्टिव थेरेपी  के समान कार्य कर सकता है।  

 4.   विषहर (डिटॉक्सिफायर – गंधक रसायन शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है)  

 -  आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: गंधक  विषनाशक और  रक्तशोधक होता है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालता है।  
   - एलोपैथिक दृष्टिकोण: एलोपैथी में  डिटॉक्सिफिकेशन के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स, NAC (N-Acetyl Cysteine), Activated Charcoal का प्रयोग किया जाता है। गंधक रसायन लीवर के ग्लूटाथियोन लेवल को बढ़ाकर शरीर को  डिटॉक्सिफाई करता है, जो एलोपैथी की हैपेटो-प्रोटेक्टिव थेरेपी से मेल खाता है।  

5.  गंधक रसायन अतिसार (डायरिया) और ग्रहणी (IBS, अपच, एसिडिटी) में  लाभदायक

 -  आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: गंधक अतिसारहर और दीपन-पाचन गुणों से युक्त होता है, जो पाचन शक्ति को सुधारता है।  
   -  एलोपैथिक दृष्टिकोण: डायरिया और IBS के लिए एलोपैथी में  एंटी-डायरियल एजेंट्स (Loperamide), प्रोबायोटिक्स और एंटासिड्स* का उपयोग किया जाता है। गंधक आंतों की  पाचन अग्नि  को सुधारकर एलोपैथिक गैस्ट्रो-प्रोटेक्टिव एजेंट्स की तरह कार्य करता है।  

 6. गंधक रसायन रक्त एवं त्वचा दोष नाशक (त्वचा को साफ और चमकदार बनाता है)  

  -   आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: गंधक त्वचा को निखारने और रक्त शुद्ध करने में सहायक होता है।  
   -  एलोपैथिक दृष्टिकोण: एलोपैथी में स्किन क्लियरिंग एजेंट्स (Isotretinoin, Vitamin C, Zinc, Biotin) का प्रयोग किया जाता है। गंधक त्वचा की  Sebaceous Gland Regulation में मदद करता है, जिससे मुंहासे, फुंसी, और एलर्जी में सुधार होता है।  

 7. गंधक रसायन  हृदयशूलहर (हृदय संबंधी विकारों में लाभकारी) 

 -  आयुर्वेदिक दृष्टिकोण:  गंधक हृदय को *बल प्रदान करने  वाला औषधीय तत्व है।  
   -  एलोपैथिक दृष्टिकोण:  एलोपैथी में  एंटी-कोएगुलेंट्स (Aspirin), स्टैटिन्स (Atorvastatin), और ब्लड प्रेशर कंट्रोलर का उपयोग किया जाता है। गंधक  ब्लड फ्लो को सुधारता है और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है, जिससे यह  कार्डियो-प्रोटेक्टिव एजेंट के रूप में कार्य करता है।  

8.  गंधक रसायन जीर्ण ज्वरहर (पुराने बुखार में लाभदायक)

 -  आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: गंधक में *ज्वरघ्न* और  रसायन गुण होते हैं, जो लंबे समय तक रहने वाले बुखार को ठीक करने में मदद करता है।  
   -  एलोपैथिक दृष्टिकोण: पुराने बुखार के लिए एलोपैथी में एंटीबायोटिक्स (Doxycycline, Azithromycin) और एंटी-वायरल ड्रग्स* का उपयोग किया जाता है। गंधक *इम्यून बूस्टर* के रूप में कार्य कर सकता है और संक्रमणों से बचाव में सहायक हो सकता है।  

9.गंधक रसायन प्रमेह हर (मधुमेह और मूत्र रोगों में लाभकारी)

  -  आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: गंधक मूत्रमार्ग की सफाई करता है और  प्रमेह (Diabetes और UTI) में लाभदायक होता है।  
   -  एलोपैथिक दृष्टिकोण:  एलोपैथी में डायबिटीज को  मेटफॉर्मिन, इंसुलिन, DPP-4 इनहिबिटर्स  द्वारा नियंत्रित किया जाता है। गंधक  इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधार सकता है और पेशाब में जलन जैसी समस्याओं में भी मदद कर सकता है।  

गंधक रसायन निर्माण विधि 

गंधक रसायन बनाने के लिए सर्वप्रथम गाय के दूध और देसी गाय के घी से शुद्ध किया हुआ गंधक को लेना है । 
अव क्रमशः इलायची दालचीनी तेज पत्ता और नागकेसर mix काढ़ा, त्रिफला का काढ़ा, ताजा गिलोय का रस, भृंगराजका रस फिर अंत में ताजा अदरक का रस से क्रमशः 8/8 बार भावना देना है ।सुखाकर इसका बारीक चूर्ण करें या चने जितना बड़ा गोलियां बनाले।

मात्रा-आध से १ माशे तक दिन में दो बार, समभाग मिश्री मिलाकर दूध के साथ सेवन करें।

 कुष्ठ रोग में अनुपान :- 
दारुहल्दी, हल्दी, मजीठ, अनन्तमूल, आँवला, गोखरू, गिलोय, काले खैर की छाल, चोपचीनी और नीम की निबोली के क्वाथ के साथ एक मास तक सेवन करें। फिर एक मास छोड़ दे। पुनः प्रारम्भ करें। इस तरह ३ वर्ष तक सेवन करने से कुष्ठ शमन हो जाते हैं।

इस गन्धक रसायन के साथ यदि रससिंदूर या सुवर्ण भस्म का सेवन किया जाय तो बलवृद्धि के लिये विशेष लाभ पहुँचता है।

इसका कार्यक्षेत्र रक्त और त्वचा है। किसी भी कारण से रक्त दूषित हुआ हो, तो उसे शुद्ध बनाना गंधक रसायन का मुख्य धर्म है। यह शरीर मे संचित हुए विकृत द्रव्यों का रूपान्तर और भेदन करके शुद्ध बनाने का कार्य भी करता है।

गंधक रसायन – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. गंधक रसायन क्या है?

गंधक रसायन एक आयुर्वेदिक औषधि है जो त्वचा रोग, पाचन तंत्र की समस्याओं और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है।

2. गंधक रसायन के प्रमुख लाभ क्या हैं?

यह औषधि त्वचा विकारों, पेट की गड़बड़ी, हृदय रोग, मधुमेह, बुखार, तथा यौन कमजोरी को दूर करने में लाभकारी होती है।

3. गंधक रसायन को कैसे लिया जाए? 

आमतौर पर, इसे 250-500 mg तक दिन में दो बार शहद, गुनगुने पानी या घी के साथ लिया जाता है। उचित मात्रा के लिए आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लें।

4. क्या गंधक रसायन के सेवन से कोई दुष्प्रभाव हो सकते हैं?

हाँ, अधिक मात्रा में सेवन करने से एसिडिटी, जलन या अन्य पाचन संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं। अतः इसे चिकित्सक की देखरेख में ही लें।मात्रा और शक्ति से अधिक गंधक रसायन पेट में मरोड़ पैदा कर सकता है। गंधक रसायन का सेवन करने पर उसमें से गंधक मल मूत्र दूध पसीना और निश्वास द्वारा बिना परिवर्तन हुए निकल जाता है।
गंधक आंतों की परिचालन क्रिया का उत्तेजित करता है मल को मुलायम बनाता है पेट में गंधक हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है जिससे अपान वायु और दस्त में दुर्गंध आता है। मगर यदि गंधक को सही विधि से शुद्ध किया गया हो तो यह स्थिति नहीं आ सकती। 

5. क्या गंधक रसायन गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित है? 

गर्भवती महिलाएं इसे केवल आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह पर ही लें, क्योंकि यह गर्भस्थ शिशु पर प्रभाव डाल सकता है।

6. क्या गंधक रसायन बच्चों को दिया जा सकता है?

छोटे बच्चों को यह औषधि देने से पहले किसी योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।

7. गंधक रसायन किन रोगों में विशेष रूप से उपयोगी है?  

यह औषधि त्वचा विकार, खुजली, दाद, सोरायसिस, सफेद दाग, पाचन तंत्र की कमजोरी, वीर्य हानि, हृदय रोग, और मधुमेह में लाभदायक मानी जाती है।

8. क्या गंधक रसायन आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा के साथ लिया जा सकता है? 

हाँ, यह औषधि शरीर को डिटॉक्स करने और पंचकर्म चिकित्सा के प्रभाव को बढ़ाने में सहायक होती है।  

9. क्या गंधक रसायन अन्य आयुर्वेदिक औषधियों के साथ लिया जा सकता है? 
 
हाँ, इसे आमतौर पर त्रिफला, गिलोय, या अन्य रक्तशोधक और पाचन सुधारक औषधियों के साथ दिया जाता है, लेकिन संयोजन के लिए चिकित्सक से परामर्श लें।

10. गंधक रसायन कितने समय तक लिया जा सकता है?

इसका सेवन रोग और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इसका नियमित सेवन करें।  

गंधक रसायन का प्रयोग कैसे करें 

गंधक रसायन का प्रयोग के विषय में मेरा स्पष्ट मत है कि अल्प मात्रा में प्रत्येक 40 दिन में ब्रेक करते हुए 1 साल पर्यंत इसका प्रयोग होना चाहिए।

त्वचा रोग में माल साफ होना बेहद जरूरी है इसीलिए गंधक रसायन अवल के मुरब्बा या गुलकंद के साथ दिया जाना चाहिए 
यदि कफ वृद्धि हो या आम की वृद्धि हो ऐसी अवस्था में शहद या पीपल के साथ देना चाहिए

अगर आपके कोई और प्रश्न हैं तो कृपया कमेंट करें या आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श लें। 😊


 

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