शिवा शक्ति चूर्ण एक आयुर्वेदिक दवा है जो पतले वीर्य को गाढ़ा करने, धातु क्षय रोकने, प्रमेह, स्वप्नदोष और शरीर की गर्मी को संतुलित करने में मदद करती है। जानें इसके फायदे और सेवन विधि।
आधुनिक जीवनशैली में तनाव, अनुचित आहार और मानसिक दबाव के कारण पुरुषों में यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। पतला वीर्य (Thin Semen) और शीघ्रपतन (Premature Ejaculation) दो आम समस्याएं हैं जो पुरुषों की यौन शक्ति और आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।
इस blog में हम sex problems से संबंधित समस्या के ऊपर चर्चा करेंगे दरअसल मेरे पास एक Ayurveda formula है जिसका अक्सर हम इसी तरह के समस्या में प्रयोग करते हैं। लगभग वात और पित्त प्रधान रोगियों के ऊपर बेहद कारगर साबित होता है । तो क्यों न यह फॉर्मूला आप सभी मेरे Ayushyogi के पाठकों को भी बता दूं।
शिवा शक्ति चूर्ण एक प्राचीन आयुर्वेदिक नुस्खा है जो पुरुषों के यौन स्वास्थ्य को सुधारने के लिए उपयोग किया जाता है। यह न केवल पतले वीर्य (Thin Semen) को गाढ़ा करता है, बल्कि धातु क्षय (Dhatu Kshaya), प्रमेह (Diabetes-Induced Sexual Weakness), स्वप्नदोष (Nocturnal Emission) और शरीर की अधिक गर्मी को भी नियंत्रित करता है।
✅ पतले वीर्य को गाढ़ा करता है और पुरुषों की प्रजनन क्षमता बढ़ाता है।
✅ शरीर की अतिरिक्त गर्मी को संतुलित करता है जिससे वीर्य का पतलापन और धातु क्षय कम होता है।
✅ स्वप्नदोष और प्रमेह को रोकता है, जिससे शरीर में कमजोरी नहीं आती।
✅ सेक्स टाइम बढ़ाने और शक्ति सुधारने में मदद करता है।
✅ प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बना है, कोई हानिकारक रसायन नहीं।
इस चूर्ण में शामिल शक्तिशाली जड़ी-बूटियां:
1. तालमखाना (Hygrophila auriculata) – वीर्य को गाढ़ा करने और यौन शक्ति बढ़ाने के लिए।
2. वंशलोचन (Bambusa arundinacea) – धातु क्षय और वीर्य कमजोरी रोकने के लिए।
3. लीसोड़ा (Cordia dichotoma) – प्रमेह और मूत्र विकारों में लाभकारी।
4. गुलनार (Punica granatum flower) – वीर्य की गुणवत्ता सुधारने में सहायक।
5. काली तिल (Sesamum indicum) – टेस्टोस्टेरोन को संतुलित करता है।
6. शिलाजीत (Asphaltum punjabinum) – यौन शक्ति बढ़ाने और शरीर को सशक्त बनाने के लिए।
7. बड़ी इलायची (Amomum subulatum) – वीर्य पुष्ट करने और पाचन सुधारने में सहायक।
8. विदारीकंद (Ipomoea digitata) – शरीर की ताकत और यौन क्षमता बढ़ाने के लिए।
9. खस (Vetiveria zizanioides) – शरीर को ठंडा करके गर्मी से होने वाली कमजोरी रोकता है।
10. मुलेठी (Glycyrrhiza glabra) – शरीर को पोषण देकर वीर्य वृद्धि करता है।
11. रेवन चीनी (Rheum emodi) – पाचन को मजबूत कर वीर्य और धातु क्षय को रोकता है।
12. वंग भस्म (Tin Oxide Bhasma) – शुक्र धातु को पोषण देकर यौन शक्ति को बढ़ाता है।
13. मुसली (Chlorophytum borivilianum) – प्राकृतिक यौन शक्ति वर्धक।
14. निशास्ता (Starch Extract) – वीर्य वृद्धि में सहायक।
15. कबाब चीनी (Piper cubeba) – स्वप्नदोष और धातु क्षय में लाभदायक।
16. खदिर (Acacia catechu) – प्रमेह और मूत्र विकारों में उपयोगी।
17. मेहंदी (Lawsonia inermis) – वीर्य की गर्मी दूर करने के लिए।
18. गिलोय सत्व (Tinospora cordifolia Extract) – रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर यौन स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक।
19. कुंदरु गोंद (Cucumis trigonus Gum) – वीर्य गाढ़ा करने और धातु रोग में फायदेमंद।
यहाँ इन जड़ी-बूटियों के गुणधर्म (Ayurvedic Properties) और दोषों पर प्रभाव का विस्तृत विवरण दिया गया है:
जड़ी-बूटी | रसा (स्वाद) | गुण | वीर्य | विपाक | दोष प्रभाव | मुख्य लाभ |
---|---|---|---|---|---|---|
तालमखाना (Hygrophila auriculata) | तिक्त, मधुर | गुरु, स्निग्ध | उष्ण | मधुर | वात-पित्त शामक | वीर्य गाढ़ा करना, यौन शक्ति बढ़ाना |
वंशलोचन (Bambusa arundinacea) | मधुर, कषाय | गुरु, रूक्ष | शीत | मधुर | पित्त-कफ शामक | धातु क्षय रोकना, वीर्य को सशक्त बनाना |
लीसोड़ा (Cordia dichotoma) | मधुर, तिक्त | गुरु, स्निग्ध | शीत | मधुर | पित्त-वात शामक | प्रमेह, मूत्र विकारों में लाभकारी |
गुलनार (Punica granatum flower) | कषाय, तिक्त | लघु, रूक्ष | शीत | मधुर | पित्त-कफ शामक | वीर्य की गुणवत्ता सुधारना |
काली तिल (Sesamum indicum) | मधुर, तिक्त | स्निग्ध, गुरु | उष्ण | मधुर | वात-कफ शामक | टेस्टोस्टेरोन संतुलित करना |
शिलाजीत (Asphaltum punjabinum) | तिक्त, कषाय | लघु, तेज | उष्ण | कटु | त्रिदोष शामक (मुख्यतः वात-कफ) | यौन शक्ति बढ़ाना, बल प्रदान करना |
बड़ी इलायची (Amomum subulatum) | कटु, तिक्त | लघु, रूक्ष | उष्ण | कटु | वात-कफ शामक | वीर्य पुष्ट करना, पाचन सुधारना |
विदारीकंद (Ipomoea digitata) | मधुर | गुरु, स्निग्ध | शीत | मधुर | वात-पित्त शामक | यौन क्षमता और शरीर की ताकत बढ़ाना |
खस (Vetiveria zizanioides) | तिक्त, मधुर | गुरु, स्निग्ध | शीत | मधुर | पित्त शामक | गर्मी से होने वाली कमजोरी रोकना |
मुलेठी (Glycyrrhiza glabra) | मधुर | गुरु, स्निग्ध | शीत | मधुर | वात-पित्त शामक | वीर्य वृद्धि, पोषण प्रदान करना |
रेवन चीनी (Rheum emodi) | कटु, तिक्त | लघु, रूक्ष | उष्ण | कटु | वात-कफ शामक | पाचन सुधारना, धातु क्षय रोकना |
वंग भस्म (Tin Oxide Bhasma) | मधुर, कषाय | लघु, रूक्ष | उष्ण | मधुर | वात-कफ शामक | शुक्र धातु पोषण, यौन शक्ति बढ़ाना |
मुसली (Chlorophytum borivilianum) | मधुर | गुरु, स्निग्ध | शीत | मधुर | वात-पित्त शामक | प्राकृतिक यौन शक्ति वर्धक |
निशास्ता (Starch Extract) | मधुर | गुरु, स्निग्ध | शीत | मधुर | वात-पित्त शामक | वीर्य वृद्धि में सहायक |
कबाब चीनी (Piper cubeba) | कटु, तिक्त | लघु, तीक्ष्ण | उष्ण | कटु | वात-कफ शामक | स्वप्नदोष और धातु क्षय में लाभकारी |
खदिर (Acacia catechu) | कषाय, तिक्त | लघु, रूक्ष | शीत | कटु | पित्त-वात शामक | प्रमेह और मूत्र विकारों में उपयोगी |
मेहंदी (Lawsonia inermis) | कषाय, तिक्त | लघु, रूक्ष | शीत | कटु | पित्त-वात शामक | वीर्य की गर्मी दूर करना |
गिलोय सत्व (Tinospora cordifolia Extract) | तिक्त | गुरु, स्निग्ध | शीत | मधुर | त्रिदोष शामक | रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना, यौन स्वास्थ्य सुधारना |
कुंदरु गोंद (Cucumis trigonus Gum) | मधुर | गुरु, स्निग्ध | शीत | मधुर | वात-पित्त शामक | वीर्य गाढ़ा करना, धातु रोग में लाभकारी |
निष्कर्ष:
अधिकतर जड़ी-बूटियाँ वीर्य पुष्टिकर और यौन शक्ति वर्धक हैं।
गर्म प्रकृति वाले तत्व (शिलाजीत, कबाब चीनी, रेवन चीनी) पाचन और वीर्य उत्पादन को उत्तेजित करते हैं।
शीतल प्रकृति वाले तत्व (मुलेठी, विदारीकंद, खस, निशास्ता) शरीर को पोषण देकर शुक्र धातु की रक्षा करते हैं।
यह मिश्रण त्रिदोष संतुलन में सहायक है, विशेषकर वात और पित्त विकारों में लाभकारी।
- 1-2 चम्मच चूर्ण* सुबह और रात को गुनगुने दूध के साथ लें।
- अधिकतम लाभ के लिए *कम से कम 3 महीने तक नियमित सेवन करें।
- अधिक गर्म मसालेदार भोजन और तली-भुनी चीजों से बचें।
- योग और प्राणायाम के साथ इसका सेवन करने से अधिक लाभ होगा।
✔ दूध, घी, और बादाम का सेवन करें।
✔ ताजे फल और हरी सब्जियां खाएं।
✔ मांसाहार और तली-भुनी चीजों से बचें।
✔ प्रतिदिन योग और व्यायाम करें।
✔ तनाव और चिंता से बचें।
✔ अच्छी नींद लें और शरीर को आराम दें।
निष्कर्ष (Conclusion)
शिवा शक्ति चूर्ण एक संपूर्ण आयुर्वेदिक समाधान है जो वीर्य की गुणवत्ता सुधारने, धातु क्षय रोकने, शीघ्रपतन कम करने और यौन शक्ति बढ़ाने में सहायक है। यदि आप इन समस्याओं से परेशान हैं, तो इस चूर्ण का सेवन करें और अपने यौन स्वास्थ्य को पुनः प्राप्त करें।
ऊपर वर्णित जड़ी बूटियां में से तालमखाना (Hygrophila auriculata), वंग भस्म (Tin Oxide Bhasma), और कुंदरु गोंद (Cucumis trigonus Gum) शुक्र धातु को पोषण देकर वीर्य गाढ़ा करने में सहायक हैं।
ऊपर वर्णित जड़ी बूटियां में से शिलाजीत, मुसली, विदारीकंद, और तालमखाना प्राकृतिक रूप से यौन शक्ति को बढ़ाते हैं और शरीर को सशक्त बनाते हैं।
ऊपर वर्णित जड़ी बूटियां में से वंशलोचन, वंग भस्म, कबाब चीनी, और गुलनार धातु क्षय को रोकने और वीर्य की गुणवत्ता सुधारने में मदद करते हैं।
ऊपर वर्णित जड़ी बूटियां में से कबाब चीनी (Piper cubeba) और गुलनार (Punica granatum flower) स्वप्नदोष को नियंत्रित करने में सहायक हैं।
ऊपर वर्णित जड़ी बूटियां में से मेहंदी (Lawsonia inermis), खस (Vetiveria zizanioides), और गिलोय सत्व (Tinospora cordifolia) वीर्य की अधिक गर्मी को शांत कर उसकी गुणवत्ता सुधारते हैं।
ऊपर वर्णित जड़ी बूटियां में से लीसोड़ा, खदिर, और गिलोय सत्व प्रमेह और मूत्र संबंधी विकारों में मददगार होते हैं।
काली तिल (Sesamum indicum) टेस्टोस्टेरोन को प्राकृतिक रूप से संतुलित करने में सहायक है।
ऊपर वर्णित जड़ी बूटियां में से खस (Vetiveria zizanioides) और मुलेठी (Glycyrrhiza glabra) शरीर को ठंडा करके कमजोरी को दूर करने में सहायक हैं।
हालांकि ये सभी जड़ी-बूटियाँ प्राकृतिक हैं, लेकिन हर व्यक्ति का शारीरिक संतुलन अलग होता है। इसलिए वैद्य या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इनका सेवन करें।
इन्हें चूर्ण या अवलेह, के रूप में लिया जा सकता है। कुछ विशेष योगों में शहद, दूध या घी के साथ लेने से इनका प्रभाव बढ़ जाता है।
सही मात्रा और संयोजन में लेने पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होता, लेकिन अत्यधिक सेवन से पेट संबंधी दिक्कतें या रक्तचाप प्रभावित हो सकता है।
हाँ, ये जड़ी-बूटियाँ पुरुषों और महिलाओं दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक हैं, लेकिन सेवन से पहले सही मात्रा और उपयोग विधि जानना जरूरी है।
हाँ, इसे चूर्ण, अवलेह या कैप्सूल के रूप में तैयार करके सेवन किया जा सकता है।
हाँ, इसमें शिलाजीत, विदारीकंद, और मुलेठी जैसी जड़ी-बूटियाँ हैं, जो शरीर को ताकत देती हैं और थकान को कम करती हैं।
आमतौर पर 40 से 90 दिन तक नियमित सेवन करने से अच्छे परिणाम मिलते हैं। विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही सेवन करें।
अगर आपको किसी और सवाल का जवाब चाहिए, तो बताइए! 😊
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